श्लोक (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड, सर्ग 105, श्लोक 12)

🌸 ब्रह्माकृत अमोघ स्तुति 🌸 🔱 Shloka (Valmiki Ramayana – Yuddha Kanda, Sarga 105.12): भवान् नारायणो देवः श्रीमांश्चक्रायुधो विभुः।एकशृङ्गो वराहस्त्वं भूतभव्यसपत्नजित्॥ 🌼 Meaning in Hindi (सरल हिन्दी अर्थ): हे प्रभो राम!आप ही नारायण हैं — देवों के देव।आप लक्ष्मीपति हैं, आपके हाथ में सुदर्शन चक्र है।आप सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान हैं।आपने एकशृंग मीन रूप और वराह अवतार … Read more

राम की लीला और शिव की भूमिका | राम बने कृष्ण

खंड 4: राम की लीला और शिव की भूमिका 4.1: साकेत में शिव का अनुभव अब तो शिव-मानस में एक संसार उतर आया, देखते ही देखते साकेत का द्वार दृष्टिगोचर हुआ। पुरी में प्रवेश कर, दोनों महल में पहुँच गए। जब प्रभु के समीप माता सीता आयीं, तो शिव के हृदय के परमानन्द के बाँध … Read more

शिव और कृष्ण का संवाद | राम बने कृष्ण

खंड 3: शिव और कृष्ण का संवाद 3.1: कृष्ण और शिव का साक्षात्कार राधा दूर और दूर होती गईं, कृष्ण अपनी पीड़ा छिपाकर, शिव के हृदय से बाहर आए, और शिव पर अनायास मुस्कुराए। शिव बोल उठे — “हे प्रभो! हे राम! आप मेरे हृदय से क्यों निकल आए?” कृष्ण ने कहा — “हे शिव! … Read more

प्रकृति का पुनर्जागरण और सृष्टि का संकल्प | राम बने कृष्ण

खंड 2: प्रकृति का पुनर्जागरण और सृष्टि का संकल्प 2.1: ज्ञान-शक्ति का संदेश प्रभु की ज्ञान-शक्ति ने क्रिया-शक्ति को पुनः जगाया, और इच्छा-शक्ति तक अपना संदेश पहुँचाया। यह जान प्रकृति मुस्कुरा उठी, प्रभु का संकल्प दोहरा उठी, इस सृष्टि को आगे बढ़ना होगा। 2.2: शिव का सांसारिक होना राम के ही आकर्षण के कर्षण से … Read more

एकात्म का परम अनुभव | राम बने कृष्ण

खंड 1: एकात्म का परम अनुभव 1.1: राम में आत्मा का रमण हर आत्मा को इस सृष्टि मेंराम से विलग हो आना है,हर आत्मा को पुनःराम में ही मिल जाना है। प्रभु-स्वर कर्णामृत बना,शिव-हृदय में उतर गया।मैं तो राम से विलग हुआ,फिर राम में समा भी गया।इस अनुभूति ने राम को,शिव के रोम-रोम में रमा … Read more

राम और कृष्ण: कला का राम रहस्य

🔹 श्री राम का परम स्वरूप – कला का रहस्य और सार श्रीराम परात्पर ब्रह्म हैं, जिनकी परम सत्ता इस संपूर्ण ब्रह्मांड के परे साकेत में स्थित है। वे अपरिवर्तनीय (immutable) स्वरूप वाले ‘कूटस्थादिपुरुष’ हैं, जो ‘कलानिधि’ अर्थात् समस्त कलाओं के मूल स्रोत हैं। नारद पञ्चरात्र और श्रीमद्भागवत पुराण जैसे शास्त्र उनके इसी परम स्वरूप … Read more

The Genesis of Ram Rahasya: A Journey from Childhood Inquiry to Cosmic Revelation

Childhood Roots and Formative Influences My journey toward what would eventually evolve into Ram Rahasya began not in the hallowed halls of academia, nor in the stillness of Dhyana. It began in the simple yet profound atmosphere of my childhood village—shaped by the everyday wisdom of my father, a remarkable science teacher with a deeply … Read more

विराट से परे दुर्धर्ष: जब राम ने देवों को बताया अपना मूल स्वरूप

कृष्ण – विराट रूप एवं राम – दुर्धर्ष रूप परिचय सनातन धर्म में ईश्वर के अनगिनत रूपों का वर्णन है, जो हमें उस परम सत्ता की असीम महिमा और उसके विविध आयामों का बोध कराते हैं। इन दिव्य अभिव्यक्तियों में से दो ऐसे आयाम हैं जो विशेषतः गहरे और रहस्यमय हैं: ‘विराट’ और ‘दुर्धर्ष’। जहाँ … Read more

राम रहस्य: अनादि सत्य की अनुभूति

जब काल नहीं था, तब भी “वह” विद्यमान थे। जब सृष्टि में न कोई काल था, न कोई स्थान। न कोई रूप, न कोई नाम। फिर भी वहाँ एक परमचैतन्य थे, निराकार, विकार-रहित, अनादि, और अनंत। वही, जिसे शास्त्रों ने ब्रह्म और परब्रह्म कहा है। वही अखंड सत्य, जिसका कोई आरंभ नहीं, कोई अंत नहीं, … Read more

कैवल्य: आत्मबोध और एकात्म की यात्रा (मुखपृष्ठ)

कैवल्य: आत्मबोध और एकात्म की यात्रा” नामक काव्य-प्रकाशन के मुखपृष्ठ की यह छवि Microsoft Copilot द्वारा तैयार की गई है, जो आपकी कल्पना को दृश्य रूप देने के लिए समर्पित है।