राम की लीला और शिव की भूमिका | राम बने कृष्ण

खंड 4: राम की लीला और शिव की भूमिका 4.1: साकेत में शिव का अनुभव अब तो शिव-मानस में एक संसार उतर आया, देखते ही देखते साकेत का द्वार दृष्टिगोचर हुआ। पुरी में प्रवेश कर, दोनों महल में पहुँच गए। जब प्रभु के समीप माता सीता आयीं, तो शिव के हृदय के परमानन्द के बाँध … Read more

शिव और कृष्ण का संवाद | राम बने कृष्ण

खंड 3: शिव और कृष्ण का संवाद 3.1: कृष्ण और शिव का साक्षात्कार राधा दूर और दूर होती गईं, कृष्ण अपनी पीड़ा छिपाकर, शिव के हृदय से बाहर आए, और शिव पर अनायास मुस्कुराए। शिव बोल उठे — “हे प्रभो! हे राम! आप मेरे हृदय से क्यों निकल आए?” कृष्ण ने कहा — “हे शिव! … Read more

प्रकृति का पुनर्जागरण और सृष्टि का संकल्प | राम बने कृष्ण

खंड 2: प्रकृति का पुनर्जागरण और सृष्टि का संकल्प 2.1: ज्ञान-शक्ति का संदेश प्रभु की ज्ञान-शक्ति ने क्रिया-शक्ति को पुनः जगाया, और इच्छा-शक्ति तक अपना संदेश पहुँचाया। यह जान प्रकृति मुस्कुरा उठी, प्रभु का संकल्प दोहरा उठी, इस सृष्टि को आगे बढ़ना होगा। 2.2: शिव का सांसारिक होना राम के ही आकर्षण के कर्षण से … Read more

एकात्म का परम अनुभव | राम बने कृष्ण

खंड 1: एकात्म का परम अनुभव 1.1: राम में आत्मा का रमण हर आत्मा को इस सृष्टि मेंराम से विलग हो आना है,हर आत्मा को पुनःराम में ही मिल जाना है। प्रभु-स्वर कर्णामृत बना,शिव-हृदय में उतर गया।मैं तो राम से विलग हुआ,फिर राम में समा भी गया।इस अनुभूति ने राम को,शिव के रोम-रोम में रमा … Read more