परिचय
भारतीय सनातन परंपरा के राम रहस्य दर्शन में परात्परा भगवती सीता केवल परात्पर भगवान राम की अर्धांगिनी नहीं, बल्कि स्वयं आदिशक्ति हैं — जो ब्रह्मांड को चलाने वाली त्रिविध शक्तियों में प्रकट होती हैं: ये त्रिविध शक्ति हैं इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति, और साक्षात (ज्ञान) शक्ति।
यह गूढ़ रहस्य विशेष रूप से सीता उपनिषद् और ब्रह्माण्ड पुराण में प्रकट होता है।
१. सीता उपनिषद् के महत्वपूर्ण श्लोक – त्रिविध शक्ति
इच्छाज्ञानक्रियाशक्तित्रयं यद्भावसाधनम् ।
तद्ब्रह्मसत्तासामान्यं सीतातत्त्वमुपास्महे ॥
इस श्लोक में स्पष्ट कहा गया है कि:
सीता वह तत्त्व हैं, जिनमें इच्छा, ज्ञान और क्रिया — तीनों शक्तियां निहित हैं, जो ब्रह्म की समान सत्ता हैं।
सा देवी त्रिविधा भवति शक्त्यासना इच्छाशक्तिः
क्रियाशक्तिः साक्षाच्छक्तिरिति ।
यहाँ कहा गया है कि सीता जी त्रिविधा हैं —
- इच्छाशक्ति — संकल्प और इच्छा की शक्ति,
- क्रियाशक्ति — कर्म और क्रिया की शक्ति,
- साक्षात् शक्ति — ज्ञान और चेतना की प्रत्यक्ष शक्ति।
श्रीभूमिनीलात्मिका भद्ररूपिणी प्रभावरूपिणी
सोमसूर्याग्निरूपा भवति ।
इस श्लोक में उनकी इच्छा शक्ति के तीन दिव्य स्वरूपों का वर्णन है —
- श्रीभूमि — जो श्री लक्ष्मी का स्वरूप है, वैभव और समृद्धि का स्रोत।
- नीलात्मिका — जो नीला रंग धारण कर औषधीय शक्ति, पोषण और जीवनदायिनी हैं।
- भद्ररूपिणी, प्रभावरूपिणी, सोमसूर्याग्निरूपा — यह दर्शाता है कि वे शक्ति और प्रकाश के विविध रूपों में सर्वत्र विद्यमान हैं, जैसे चंद्रमा (सोम), सूर्य (सूर्य), और अग्नि (अग्नि)।
२. ब्रह्माण्ड पुराण में सीता – त्रिविध इच्छा शक्ति
ब्रह्माण्ड पुराण इस तथ्य को आगे विस्तार से बताता है कि सीता वह मूल प्रकृति (मूलप्रकृति) हैं, जो तीनों लोकों की आधारशिला हैं।
- श्री देवी — इच्छा शक्ति, जो समृद्धि और वैभव प्रदान करती हैं, जो कृष्णावतार में रुक्मिणी के रूप में प्रकट होती हैं।
- भू देवी — इच्छा शक्ति जो धरती का स्वरूप, स्थिरता और आधार हैं, जो कृष्णावतार में सत्यभामा के रूप में प्रकट होती हैं।
- नीला देवी — इच्छा शक्ति जो जीवनदायिनी, औषधीय और पोषण शक्ति हैं, जो कृष्णावतार में राधिका के रूप में प्रकट होती हैं।
यह त्रिदेव स्वरूप शक्तियां भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों में प्रतिबिंबित होती हैं, खासकर कृष्णावतार में:
| सीता के स्वरूप | संबंधित कृष्णावतार रूप | भूमिका / शक्ति |
|---|---|---|
| श्री देवी (इच्छाशक्ति) | रुक्मिणी | लक्ष्मी स्वरूप, वैभव और समृद्धि की देवी |
| भू देवी (स्थिरता) | सत्यभामा | धरती स्वरूप, शक्ति और स्थिरता की देवी |
| नीलादेवी (पोषण) | राधिका | प्रेम और पोषण की शक्ति |
इस प्रकार, सीता जी की त्रिविधा शक्तियां कृष्णावतार की प्रमुख देवियों के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांडीय संचालन में सक्रिय होती हैं।
३. त्रिदेवों में सीता की शक्ति का प्रतिबिंब
तीनों शक्तियों के आधार पर ही भगवान विष्णु के अवतारों के विभिन्न रूप प्रकट होते हैं। जैसे:
| सीता के स्वरूप | संबंधित अवतार | भूमिका / शक्ति |
|---|---|---|
| श्री देवी (इच्छाशक्ति) | रुक्मिणी | लक्ष्मी स्वरूप, वैभव की देवी |
| भू देवी (स्थिरता) | सत्यभामा | धरती स्वरूप, स्थिरता और शक्ति |
| नीलादेवी (पोषण) | राधिका | प्रेम और पोषण की शक्ति |
४. रामचरितमानस में भी उल्लेख
जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।
भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई॥
यह पद दर्शाता है कि श्रीराम के वाम भाग (बाईं ओर) में ही सीता स्थित हैं, जो जगत की सभी गुण-शक्तियों का आधार हैं।
निष्कर्ष
- सीता सम्पूर्ण सृष्टि की त्रिविधा शक्ति हैं।
- वे इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति और ज्ञान (साक्षात) शक्ति के रूप में ब्रह्मांड के संचालन में लगी हैं।
- उनका यह स्वरूप ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार की आधारशिला है।
- इस प्रकार, राम और सीता मिलकर परब्रह्म और पराशक्ति का दिव्य युगल स्वरूप हैं।