रमते सर्वभूतेषु: राम का सर्वव्यापक और अद्वैत स्वरूप

श्लोक (स्कन्द पुराण से):
रमते सर्वभूतेषु स्थावरेषु चरेषु च ।
अन्तरात्मस्वरूपेण यच्च रामेति कथ्यते।।

रमते सर्वभूतेषु: राम का सर्वव्यापक और अद्वैत स्वरूप विषयक एक भव्य चित्र जिसमें भगवान श्रीराम और देवी सीता दिव्य प्रकाश से आभासित रूप में विराजमान हैं। यह छवि स्कन्द पुराण के श्लोक “रमते सर्वभूतेषु स्थावरेषु चरेषु च” पर आधारित है, जिसमें राम तत्व की सर्वव्यापक चेतना को चित्रात्मक रूप दिया गया है।
Copilot Generated — सियाराम का यह दिव्य रूप दर्शाता है वह अद्वैत ज्योति जो स्थावर–जंगम, सजीव–निर्जीव सभी में समाहित है — “रमते सर्वभूतेषु।”

भावार्थ और गहरा अर्थ

यह श्लोक हमें बताता है कि ‘राम’ उस अनंत चेतना का रूप है जो हर जीव, हर वस्तु के भीतर अन्तरात्मा के रूप में रमण करती है।
चाहे वे स्थिर हों या गतिशील, सजीव हों या निर्जीव — सभी में एक रूप से ‘राम’ व्याप्त हैं।


राम का स्वरूप — सीमाहीन और सर्वव्यापी

  • राम का स्वरूप किसी विशेष समय, स्थान या शरीर तक सीमित नहीं है।
  • वे निराकार हैं, फिर भी हर रूप में समाहित हैं।
  • वे अद्वैत हैं — जहाँ कोई द्वैत या भेद नहीं रहता, केवल एकता और समरसता होती है।
  • ‘राम’ वह अन्तर्निहित चेतना हैं, जो हर जीव के हृदय में वास करती है।
  • वे सर्वत्र व्यापी प्रकाश हैं, जो हर वस्तु में झलकता है।
  • वे आत्मिक शांति हैं, जो गहन मन की गहराइयों में अनुभूति होती है।

‘राम’ नाम का गूढ़ अर्थ

जब हम ‘राम’ का उच्चारण करते हैं, तो केवल एक देवता का स्मरण नहीं करते, बल्कि उस सर्वव्यापक सत्ता का ध्यान करते हैं, जो हमारे भीतर और सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है।
राम हैं — मन को रमणीयता देने वाला, आत्मा को छूने वाला, और हमें हमारे भीतर के उस सत्य का दर्शन कराने वाला।


आपके लिए संदेश

अगली बार जब आप ‘राम’ का नाम लें, तो मन को केंद्रित करें और अनुभव करें कि राम कहीं बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर ही रमण कर रहे हैं।
यह अनुभव आपको गहन शांति, आनंद और आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाएगा।


समापन

यह श्लोक हमें अद्वैत का गहरा अनुभव कराता है — जहाँ सब कुछ एक है और वह एक ‘राम’ है।
शांत मन से इस विचार में लीन होकर आप धीरे-धीरे उस अनंत सत्य में डूब जाएंगे जो सदैव रहा है, है और रहेगा।


श्लोक स्रोत: स्कन्द पुराण — निर्वाण खण्ड

🔍 हमारे खंड काव्य

🔹 कैवल्य, आत्मबोध और एकात्म की यात्रा
🔹 राम बने कृष्ण: एकात्मकता से सर्वात्मकता

🕉️ अधिक जानकारी के लिए आप मूल उपनिषदों के पाठ SanskritDocuments.org या Vedanta Spiritual Library पर देख सकते हैं।

जय श्रीराम!