राम रहस्य: अनादि सत्य की अनुभूति
जब काल नहीं था, तब भी “वह” विद्यमान थे। जब सृष्टि में न कोई काल था, न कोई स्थान। न कोई रूप, न कोई नाम। फिर भी वहाँ एक परमचैतन्य थे, निराकार, विकार-रहित, अनादि, और अनंत। वही, जिसे शास्त्रों ने ब्रह्म और परब्रह्म कहा है। वही अखंड सत्य, जिसका कोई आरंभ नहीं, कोई अंत नहीं, … Read more