निर्विकार का उदय
निर्विकार का उदय जब नहीं था काल, ना कोई स्थान था, नहीं था रूप कोई, और न कोई नाम था। परमचैतन्य फिर भी था वहां ना विकार था, वह था अनादि अनंत निराकार था॥
निर्विकार का उदय जब नहीं था काल, ना कोई स्थान था, नहीं था रूप कोई, और न कोई नाम था। परमचैतन्य फिर भी था वहां ना विकार था, वह था अनादि अनंत निराकार था॥
नीचे दिए गए श्लोक ब्रह्माण्ड पुराण के कोशलखण्ड से लिए गए हैं। ये दिखाते हैं कि यदि किसी स्थान, शास्त्र, संहिता, योग, या सभा में श्रीराम का नाम नहीं है — तो वह शून्य और मिथ्या है। 📜 श्लोक १: न तत्पुराणो नहि यत्र रामो यस्यां न रामो नहि संहिता सा ।स नेतिहासो नहि यत्र … Read more
परिचय: उपनिषदों में राम – श्लोक संग्रह यह उपनिषदों में राम – श्लोक संग्रह वेदांत के प्रमुख उपनिषदों से संकलित श्लोकों का समग्र संग्रह है, जिनमें भगवान श्रीराम का प्रत्यक्ष या सूक्ष्म रूप से उल्लेख होता है। ये श्लोक श्रीराम के परम तत्व, परब्रह्म, और मोक्षदाता के स्वरूप को उद्घाटित करते हैं।इस संग्रह में उपनिषदों … Read more
Paratpar Bhagwan Ram: Exploring the profound truth through the lens of Ram Rahasya Darshan. Welcome to a deeper exploration within the Ram Rahasya Darshan, where we unravel the profound spiritual truth of Paratpar Bhagwan Ram. You have already journeyed through the Ram Rahasya Equation — “सब राम में रमते हैं और राम सब में रमते … Read more
राम ही सर्व सार — यही वह केंद्रीय सत्य है जिसे राम रहस्य दर्शन प्रतिपादित करता है। भगवान राम न केवल भक्ति और मर्यादा के प्रतीक हैं, बल्कि संपूर्ण वैदिक और वेदान्तिक ज्ञान का परम सार भी हैं। हमारी पिछली चर्चाओं में, आपने राम रहस्य दर्शन को एकात्मक राम के अद्वैत भाव और राम रहस्य … Read more
आइए जानें: रहस्य उपनिषदों में राम ही क्यों हैं अनादि नाम? हमारी पिछली चर्चा में, हमने राम रहस्य दर्शन और उसके मूल सूत्र “राम रहस्य समीकरण – सब राम में रमते हैं और राम सब में रमते हैं” का परिचय दिया था। यह सूत्र भगवान राम को एकात्मक (एकल, अद्वैत) सत्ता के रूप में स्थापित … Read more
In the vast ocean of Vedic wisdom, a few texts gleam like rare spiritual gems—hidden, radiant, and transformative. The Ram Rahasya Upanishad is one such jewel. More than a scripture, it is a revelation. It unveils not only Shri Ram as the embodiment of divinity but also introduces the timeless vision of Ram Rahasya Philosophy, … Read more
श्लोक (स्कन्द पुराण से):रमते सर्वभूतेषु स्थावरेषु चरेषु च ।अन्तरात्मस्वरूपेण यच्च रामेति कथ्यते।। भावार्थ और गहरा अर्थ यह श्लोक हमें बताता है कि ‘राम’ उस अनंत चेतना का रूप है जो हर जीव, हर वस्तु के भीतर अन्तरात्मा के रूप में रमण करती है।चाहे वे स्थिर हों या गतिशील, सजीव हों या निर्जीव — सभी में … Read more
🔰 श्रीराम का तत्त्वस्वरूप संवाद – भूमिका यह संवाद स्कन्द पुराण में वर्णित उस अलौकिक क्षण का है जब भगवान श्रीराम अपनी दिव्य उपस्थिति में देवताओं, सिद्धों, पितरों, मुनियों और ब्रह्माण्ड के अन्य चेतन प्रतिनिधियों को अपना तत्त्वातीत स्वरूप प्रकट करते हैं। भगवान श्रीराम स्वयं ब्रह्म, विराट से भी परे, सोऽहम् परम दुर्धर्ष तत्त्व हैं। … Read more
सूक्ष्म से विराट तक — एक काव्यात्मक दृष्टि प्रस्तावना – करुणा की कालरेखा में एक विंदु राम कभी-कभी एक अनुभूति ब्रह्म की गूंज बन जाती है।राम कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। वे चेतना हैं।वे काल की धड़कनों में अनहद नाद की तरह बहते हैं।यह कविता उसी मौन नाद की प्रतिध्वनि है। करुणा की कालरेखा में … Read more