आदि – चैतन्य और प्रथम स्पंदन | कैवल्य
खंड 1: आदि चैतन्य और प्रथम स्पंदन 1.1: निर्विकार का उदय जब कुछ भी नहीं था,न स्थान, न समय,न रूप, न नाम,था वह चैतन्य निर्विकार,निराकार और अनादि था। 1.2: सृष्टि की चाह और साकार रूप का प्राकट्य उस चैतन्य के भीतरजगी थी एक चाह —सृष्टि को प्रकट करने की।उस परम चैतन्य की चाह सेएक दिव्य … Read more