योगिभिर्ध्यानगम्यम् या योगिभिर्ज्ञानगम्यम्? एक आध्यात्मिक ‘चूक’ का रहस्य
समय के प्रवाह में कुछ स्मृतियाँ धुंधली हो जाती हैं, लेकिन कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो वर्षों बाद भी मन के किसी कोने में जीवंत रहते हैं। आज से लगभग चार वर्ष पूर्व, नवम्बर 2021 की वह रविवार की सुबह मुझे आज भी स्पष्ट याद है। वह एक अनूठे बोध की शुरुआत थी। उस … Read more