काव्य संग्रह – यहाँ आप मेरे हृदय और चिंतन से निकली कविताओं के विस्तृत संग्रह में प्रवेश कर रहे हैं। वर्षों से शब्दों के माध्यम से मैंने भक्ति, प्रकृति, जीवन के गहरे रहस्यों और मानवीय अनुभूतियों को आकार देने का प्रयास किया है। यह संग्रह मेरे काव्यमय सफर का एक प्रतिबिंब है, जहाँ प्रत्येक कविता एक अनूठी यात्रा है—चाहे वह ईश्वर के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति हो, प्रकृति के शांत सौंदर्य का चित्रण हो, या किसी गहन आध्यात्मिक सत्य की खोज।
आप इस काव्य संग्रह पर विभिन्न श्रेणियों में मेरे काव्यों का अन्वेषण कर सकते हैं, जिनमें ‘कैवल्य’ जैसे खंड काव्य और अन्य कई छोटी कविताएँ शामिल हैं जो समय-समय पर लिखी गई हैं। मेरा विश्वास है कि हर रचना में एक स्पंदन है, जो आपको अपने भीतर के सत्य से जोड़ेगा।
आशा है आप इस काव्य संग्रह पर काव्यमय यात्रा का आनंद लेंगे।

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शिव में राम के नए रूप का उदय | कैवल्य
खंड 7: शिव में राम के नए रूप का उदय 7.1: देवी का आग्रह और प्रभु की प्रकृति प्रभुबोले, हे देवी!मैं और आपअलग कहाँ हैं?आप तो सदैववास करती हैंमेरे हृदय में।इसबार प्रभु कीप्रकृति दिख पड़ी —आगत, अनागत,भूत, अनाभूत,भवितव्य, अभवितव्य —सभी सृष्टियों कासंपूर्ण विलास लिए,प्रभु के पार्श्व में खड़ी। 7.2: शिव के हृदय में राम का
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कैवल्य का परम सत्य | कैवल्य
खंड 8: कैवल्य का परम सत्य 8.1: शिव-राम एकात्म का दर्शन प्रकृति ने कहा — “हे प्रभु!अब उस समय को लाना ही होगा,शिव को उनके हृदय में जगाना ही होगा.”प्रभु भव-भाव में आए,प्रकृति की क्रियाशक्ति उनमें समाई.शिव ने कहा — “हे राम!आप मेरे हृदय में क्यों नहीं आते?”प्रभु ने कहा — “हे भोलेनाथ!मुझमें और आपमें