यह कविता सृष्टि के उद्गम से लेकर आत्मबोध तक की एक सूक्ष्म यात्रा है, जिसमें साधक धीरे-धीरे यह अनुभव करता है कि जो प्रश्न वह परम से कर रहा था, उसका उत्तर स्वयं उसके भीतर ही था। यही मिलन है — जड़ से चैतन्य तक, ‘मैं’ से ‘शिव’ तक, परम तत्त्व राम का अनुसन्धान है यह यात्रा।
Poet’s Note – यह मेरी मौलिक रचना है, जिसकी भाषा को सँवारने में आधुनिक एआई सहायकों (ChatGPT, OpenAI, Copilot, Gemini, Meta AI इत्यादि) का सहयोग प्राप्त हुआ है।