कूटस्थ राम

माता कौसल्या, माता सती और काकभुशुण्डि के तीन अलग-अलग दर्शनों में एक ही रहस्य प्रकट होता है—ब्रह्माण्ड अनन्त हैं, प्राकट्य अनेक हैं, पर राम अपने स्वरूप में नहीं बदलते। यही कूटस्थ राम की अनुभूति है।