गणतंत्र: द्वैत की प्रथम सन्निकटता में राम रहस्य का दर्शन
📜 कविता: गणतंत्र हमारे और तुम्हारे बीचजाति पाति की दीवार हैधर्म का बन्धन हैमतों का अन्तर हैसामाजिक स्तर हैऔर भी न जाने क्या क्याजो निर्धारित करती हैं हमारी सीमा पर मेरे और मेरे ख़ुद के बीच क्या है? क्या हम पहचानते हैं अपने आपकोक्या हम परखते हैं ख़ुद पर अपने फ़ैसले कोक्या हम जानते हैं … Read more