राम से कृष्ण: एकात्मकता की सर्वात्मक अभिव्यक्ति

“यो रामः कृष्णतामेत्य सार्वात्म्यं प्राप्य लीलया।”— श्रीकृष्णोपनिषद् प्रस्तावना सनातन परम्परा में श्रीराम और श्रीकृष्ण को प्रायः दो भिन्न अवतारों के रूप में देखा जाता है। परन्तु उपनिषदों, पुराणों और राम रहस्य दर्शन की दृष्टि से यह भिन्नता बाह्य है; तत्त्वतः दोनों एक ही परम चेतना की दो परस्पर संबद्ध अवस्थाओं का उद्घाटन करते हैं। श्रीराम … Read more